MY DRAGGING TRANSITION TO ENGLISH

By COl J S Malik · Green · 2302

कुंजपुरा डायरीज... 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 MY DRAGGING TRANSITION TO ENGLISH प्राथमिक विद्यालय, गाँव उमरा(हिसार) से मैं अपनी शिक्षा पूरी करके "सैनिक स्कूल कुंजपुरा" में दाखिल हुआ। ये 1982 की बात है। हिन्दी medium से English medium का बदलाव अत्यंत कठिन था। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी. I kept dragging my pen endlessly.💥 आठवीं class की बात है। अब तक our most respected English teacher Narang sir ने letter writing के सारे उसूल सीखा दिए थे। और हिंदी मिडियम से इंग्लिश मीडियम में हमारा smooth transition लगभग हो चुका था। मैं written English की बात कर रहा हूं। पर बोलचाल में सब लड़के English को अपने अपने ग्रामीण अंदाज में ही बोलते थे। उस जमाने में मेरे चाचा को घर पर खूब लेटर लिखता था मैं। मेरे चाचा English बखूबी समझते थे। और मैं भी उन्हें impress करना चाहता था। राजी खुशी सब ठीक ठाक etc. Remember ! the blue colour Inland Letter!! 💥 इस प्रकार घर वालों को मेरे दुरुस्त होने की ख़बर पहुंच जाती थी और letter writing की practice भी हो जाती थी। कई महीनों तक ये सिलसिला चला । एक दिन जब मैने अंकल की लिखी return डाक खोली तो अंकल ने गुस्से में लिखा था "तुझे ये सीखने भेजा था नालायक"। जैसे Narang sir द्वारा सिखाया गया था, मैं beginning of letter में हमेशा "Dear Uncle'' लिखता था । उसके बाद मैने हर letter में "Respected अंकल जी" ही लिखा !!💥 अपनी नई नई सीखी English मैने जीवन में खूब आजमाई और अपनाई, पर घरवालों पर नहीं!! सिद्धिम: सन्नद: Col JitenderMalik @2302@Green@Class of '82

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